JNU से दिक्कत नहीं है, गरीब का बच्चा पढ़कर मुझसे सवाल करता है, ये दिक्कत है

0

Hits: 1

जेएनयू में बढ़ी हुई फीस और तमाम तरह की पाबंदियों का विरोध करने वाले छात्र-छात्राओं पर कल दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन चलाया। उपराष्ट्रपति के सामने अपनी मांग उठाने गए छात्रों को मारा-पीटा और घसीटा। लेकिन ये अत्याचार वहीं पर खत्म नहीं हुआ, इसके बाद टीवी चैनलों पर बिठा दिए गए तमाम टीवी एंकर, JNU पर प्राइम टाइम डिबेट करने के लिए।

ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी ने न सिर्फ सरकार का पक्ष लिया बल्कि तमाम आंकड़ों के हवाले से ये दलीलें दी कि जेएनयू के छात्रों को सबसे सस्ती शिक्षा मिलती है इसलिए उन्हें बढ़ी हुई फीस का विरोध नहीं करना चाहिए।

इसी तरह तमाम टीवी चैनलों के एंकर, रिपोर्टर कोशिश करते रहे कि जेएनयू छात्रों को मुफ्तखोर और टैक्स के पैसे पर पड़ने वाले बोझ की तरह प्रस्तुत किया जाए। आज तक की एंकर श्वेता सिंह छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की तस्वीर शेयर करते हुए लिखती हैं- एक तरफ़ हैं 20-21 साल की उम्र में नौकरी करके परिवार का पेट पालने वाले जवान। (जो टैक्स भी भरते हैं) दूसरी तरफ़…

सोचिए जिन पत्रकारों का काम था सत्ता से सवाल पूछना वो खुद ही सत्ताधारियों का पक्ष ले रहे हैं। जिन पत्रकारों का काम था छात्र-छात्राओं की आवाज बनना वो छात्र छात्राओं पर तंज कस रहे हैं, साथ ही तमाम प्रोपेगंडा चला रहे हैं। ऐसे में इस सरकार से सवाल कौन पूछेगा?

जाहिर सी बात है विश्वविद्यालयों के छात्र छात्राओं को ही सामने आना होगा और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म को जरिया बनाना होगा । छात्र-छात्राओं के इस आंदोलन को सोशल मीडिया पर समर्थन मिलता दिख रहा है। तमाम लोग अपना समर्थन दिखाते हुए सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। इस बीच मीडिया को भी लताड़ लगाई जा रही है और मोदी सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाया जा रहे हैं।

ट्विटर पर एक यूजर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए लिखा- जेएनयू से दिक्कत नहीं है, गरीब का बच्चा पढ़कर मुझसे सवाल करता है, ये दिक्कत है।

इसी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा शिवांगी चौबे ने जेएनयू बंद करने की मांग पर जवाब देते हुए लिखा- हां जेएनयू बंद कर दो , नहीं तो पढ़े लिखे लोग मंदिर में घंटा कैसे बजाएंगे।