‘मोदी दादा जी, मरने की इजाजत दे दो’- अपने कलेजे के टुकड़ों के साथ मां मांग रही इच्छामृत्यु

0

Hits: 3

अपने ऊपर चाहे दुखों का पहाड़ आ जाए मां झेल लेती है, लेकिन औलाद पर आए एक तकलीफ से मां टूट जाती है। अपने कलेजे के टुकड़ों को जान से ज्यादा चाहने वाली मां जब उनके लिए इच्छा मृत्यु मांगने लगे तो सोच कर देखिए कि उसने कलेजे पर कितना बड़ा पत्थर रखा होगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं चोलापुर के मुरेरी गांव की रहने वाली सुमन मिश्रा की। पति की किडनी की बीमारी से लड़ते-लड़ते सुमन नहीं टूटी पर बच्चों की भूख ने उस दोराहे पर खड़ा कर दिया कि आज उसे अपने पूरे परिवार के लिए इच्छा मृत्यु की मांग करनी पड़ रही है।वाराणसी में कचहरी परिसर में शनिवार को यह पूरा परिवार अपने हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचा था। बच्चों के नन्हें हाथों में तख्तियों पर लिखी हुई इबारत हर किसी को चौंकाने के लिए काफी थी। इस पर लिखा था कि मोदी दादा जी, अब भूख सहन नहीं होती, आयुष्मान योजना का लाभ भी नहीं मिला, अब इच्छा मृत्यु दे दो।

सुमन के पति संजय मिश्र लगभग एक साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी दोनों किडनी खराब हो चुकी है और मंडुवाडीह के एक अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन उनका डायलिसिस कराना होता है। इलाज के लिए सुहाग की निशानी तक बेच चुकी इस महिला के पास अब कुछ नहीं बचा है।संजय प्राइवेट नौकरी करते थे पर बीमारी की वजह से नौकरी भी छूट गई। इलाज में परिवार के बचे हुए पैसे और गहने तक बिक गए। कक्षा पांच और दो में पढ़ने वाले प्रिंस और रौनक की पढ़ाई भी छूट चुकी है। सुमन ने बताया कि पति की तबीयत बिगड़ने के बाद आयुष्मान भारत योजना के लिए कई बार आवेदन किया मगर उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।गंभीर रूप से बीमार पति का महंगा इलाज कराने की ताकत नहीं बची मगर वह अपने पति को मरता हुआ नहीं देख सकती। वहीं खाने के लाले पड़ गए हैं। इस वजह से वह बच्चों के साथ इच्छा मृत्यु मांग रही है। कचहरी परिसर में कुछ लोगों ने महिला को रविंद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय जाने की सलाह दी। दोपहर बाद सुमन ने संसदीय कार्यालय पहुंचकर मदद की गुहार लगाई।