‘कुंभ नहीं देखा तो भारत नहीं देखा… कई देशों के प्रतिनिधियों ने कहा, ‘ओह, दिस इज इनक्रेडिबल इंडिया’

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परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा मुझे लगता है कि यह शाही स्नान नहीं बल्कि संगम की सफाई का स्नान है। गंगा से पहले संगम की सफाई का संकल्प भी लिया गया लेकिन, जब संगम के किनारे पहुंचे तो वहां की ऐसी तैयारी देखकर हम सभी दंग रह गए।

संग जुटे अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने कहा, ‘ओह, दिस इज इनक्रेडिबल इंडिया,’ अब तक भारत के बारे में जो कुछ पढ़ा और सुना था, वह यहां देखने को मिला, मै अभभिूत हूं। कुंभ नहीं देखा तो भारत नहीं देखा।

कमाल की बात है कि जिस श्रद्धा से पूरी दुनिया के लोग यहां खिंचे चले आते हैं, इतनी ठंड में भी उन्हें आस होती है कि बस, एक डुबकी लग जाए और एक आचमन हो जाए यानी ‘वन डिप, वन टिप।’ एक डुबकी, एक आचमन हो जाए तो लगता है कि मोक्ष मिल गया। तमाम लोग इसी अवधारणा से जुड़कर धन्य हो रहे, यही बातें दुनिया को चकित करती हैं।

भारत की श्रद्धा और आस्था को देखकर ऐसा लगता है कि यहां बार-बार आएं ताकि उस भारत का दर्शन कर सकें जहां न कोई रंगभेद है, न कोई छोटा है, न बड़ा है, सब एक ही गंगा में स्नान कर रहे हैं। जब तक यह संस्कृति जिंदा रहेगी, हमारा भारत जिंदा रहेगा।

मकर संक्रांति को वस्तुत: मातृक्रांति मानना चाहिए। हम विश्व को एक परिवार मानने वाले लोग हैं, जिस तरह सूर्य उत्तरायण की ओर गए, उसी तरह हमारे जीवन से भी अंधेरा दूर हो। हम अंधकार से प्रकाश की ओर जाएं। समय आ गया है कि हमलोग स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनें क्योंकि गंगा मां सभी के लिए है। यहां से संगम का संदेेश लेकर जाएं कि देश की सभी नदियां स्वच्छ और निर्मल बनें।