तो मान लें कि पीएम मोदी की उल्‍टी गिनती शुरू हो गई है!

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नई दिल्‍ली। पांच राज्‍यों में संपन्‍न विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से भाजपा और आरएसएस के अंदर मंथन जारी है। इस बात की चर्चा है कि पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव परिणामों को पीएम मोदी के भविष्‍य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने अपने मुखपत्र आर्गेनाइजर के ताजा अंक में इस बात के संकेत दिए हैं। ‘बियॉंड नंबर्स: मैसेज ऑफ दी मैंडेट’ लेख के हवाले से कहा गया है कि मोदी सरकार को जनमानस में व्‍याप्‍त वर्तमान नैरेटिव्‍स को बदलने होंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2019 में बहुमत से सत्‍ता में वापसी मोदी के लिए मुश्किल हो जाएगा।

त्रिशंकु लोकसभा की आशंका

संघ के मुखपत्र आर्गेनाइजर के इस लेख से साफ है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिलने की आशंका जाहिर की गई है। ऐसी स्थिति में 2019 में त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति बन सकती है। संघ की इन आशंकाओं को देखते हुए मोदी विरोधी भाजपा खेमे में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस बात की जानकारी संघ के लोगों को भी है। ऑर्गेनाइज़र ने अपने 23 दिसंबर के ताजा अंक में 2019 के आम चुनावों में इस बात की संभावना जताई है। साथ ही संघ का मानना है कि अगले छह महीनों तक देश में सरकार को प्रभावी तरीके से चला पाना आसान नहीं होगा।

गडकरी के क्‍यों बदल गए बोल?

अब तो मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री नितिन गडकरी के बदले बोल को भी इसी से जोड़कर देखा जाने लगा है। उन्‍होंने एक तरफ सरकार की विजय माल्या के संभावित प्रत्यर्पण को भुनाने की तरकीबें सोचने से इतर एक कार्यक्रम में कह दिया कि एक बार कर्ज न चुकाने वाले को घोटालेबाज़ कहना सही नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने फिर से एक कार्यक्रम में कहा कि भाजपा में कुछ प्रवक्‍ताओं को जरूरत से ज्यादा बोलने की आदत हो गई है। ऐसे लोगों को समझना होगा कि ज्यादा बोलना पार्टी की छवि के लिहाज से अच्‍छा नहीं होता है। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि सरकार विपक्षी एकता को देखकर सहमी हुई है।

सांसद भी उठा चुके है सवाल

हाल ही संपन्‍न संसदीय दल की बैठक में भाजपा सांसद रवींद्र कुशवाहा ने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के मोर्चे पर सरकार क्या कर रही है। इसके बाद उनकी बात के समर्थन में मध्य प्रदेश की घोसी सीट से सांसद हरि नारायण राजभर और दूसरे सांसदों ने भी कहा कि सरकार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए।

Courtesy: Patrika

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