पंचायत, कोर्ट और थाने में चली लंबी लड़ाई के बाद राजपूत गांव से गुजरा दलित का बैंड-बाजा और बारात

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संजय जाटव को घोड़ी पर चढ़ने और कुछ किलोमीटर तक बारात निकालने के लिए करीब 7 महीने तक संघर्ष करना पड़ा. जाटव ने पंचायत, कोर्ट, थाना और राज्य सरकार के नुमाइंदे से संपर्क किया. हर बार निराशा हाथ लगी. लेकिन जाटव सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने के लिए ठान ली थी. उनकी जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा और शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में खुशी-खुशी शादी हुई.

कासगंज: उत्तर प्रदेश के कासगंज में करीब 80 साल से सामाजिक आन-बान-शान के नाम पर चली आ रही कुप्रथा उस वक्त टूट गई जब एक दलित की बारात राजपूतों (ठाकुरों) के गांव से गुजरी. दलित परिवार की खुशी को दबंगों की नजर न लगे इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये थे. शनिवार की शाम को हाथरस के बसई गांव का रहने वाला दूल्हा संजय जाटव अपनी दूल्हन शीतल को लेने कासगंज का निजामपुर गांव पहुंचा. तब लोगों के चेहरों पर खुशी के साथ एक डर भी था. डर को खत्म करने के लिए आंसू गैस, बंदूक और दंगा नियंत्रण के लिए जरूरी सामान से लैस करीब 200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था.

संजय जाटव को घोड़ी पर चढ़ने और कुछ किलोमीटर तक बारात निकालने के लिए करीब 7 महीने तक संघर्ष करना पड़ा. जाटव ने पंचायत, कोर्ट, थाना और राज्य सरकार के नुमाइंदे से संपर्क किया. हर बार निराशा हाथ लगी. लेकिन जाटव सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने के लिए ठान ली थी. उनकी जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा और शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में खुशी-खुशी शादी हुई.

पुलिस ने बारात निकालने के लिए रूट तैयार किया था. उसी रास्ते से बारात गुजरी. अपर पुलिस अधीक्षक पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि गांब में बारात शांति से गई. पुलिस अभी भी अलर्ट है. दुल्हन की विदाई के बाद भी पुलिस की नजर बनी रहेगी. ताकि बाद में भी कोई अप्रिय घटना नहीं हो.
बारात गुजरने वाले रास्तों में करीब 200 पुलिसकर्मी तैनात थे. एएसपी ने बताया कि एक प्लाटून पीएसी के अलावा दो इंस्पेक्टर, 12 एसओ, 12 उपनिरीक्षक, 70 कांस्टेबल और 10 महिला कांस्टेबल के अलावा होमगार्ड आदि की तैनाती की गई थी.

दुल्हन शीतल के भाई बीटू जाटव ने कहा कि हमें नहीं लग रहा था कि इन गांवों से बारात गुजरेगी. मैंने पिछले साल दिसंबर में इसके लिए तैयारी शुरू की थी. लेकिन ठाकुर समाज ने इसका विरोध किया. जिसके बाद मैंने और संजय (दूल्हा) ने कई विभागों से संपर्क किया. हम हाईकोर्ट भी गए लेकिन समाधान नहीं निकला. उन्होंने बताया कि शादी अप्रैल में ही होने वाली थी. लेकिन ठाकुर ने विभाग को बताया कि शीतल अभी नाबालिग है.

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बीटू ने आगे कहा, ”हम खुश हैं. अभी तो कुछ नहीं होगा, लेकिन हमें डर है की बाद में ठाकुर लोग हमारा बहिष्कार ना कर दें.” ध्यान रहे की निजामपुर गांव ठाकुर बहुल है और इस गांव में मात्र छह घर जाटवों का है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ठाकुर समुदाय के लोगों से बात की गई तो एक ने कहा कि उन्हें निमंत्रण मिला था लेकिन वह आन-बान-शान की वजह से शादी में नहीं गये.

Courtesy: ABP news